Crime Patrol: Baby Tara's Condition Is Critical - Episode 89 - 2nd March 2012

Doctor was shocked to see 3 year old Tara in the hospital as she had several bruises and burns on her body which was unbearable and her condition was critical as not only her both hands and legs were fractured but her lungs were infected too, later, Rani tries to escape from the hospital but fails, as she gets caught by security gaurds who reveals gaurds and cops that she is not her mother. Rani reveals cops that her Boyfriend Nadeem had left Tara at her place and she is not sure whether Tara is Nadeem's Daughter. Rani was forcefully working with Madhu and Jagat. Cops succeeds in finding Nadeem's wife Mumtaz. Meena reveals cops that Tara is Zarina's daughter who stays in Rajasthan. Where is Nadeem? Will cops succeed in finding Zarina Shaikh?

Crime Patrol: Cops Succeed In Finding Baby Tara's Mother - Episode 90 - 3rd March 2012


Rajasthan Police tries their best to find Baby Tara's mother Zarina Shaikh but cops fail to understand as how did Zarina reached Rajasthan from Delhi later, Meena reveals cops that she knows Baby Tara's siblings as she had sold Tara's elder sister Aasma to Rajni and thus Cops start searching Aasma and Kishorilal in Jhunjhuna later, cops succeeds in finding Tara's sister Aasma. Rani was raped by her Husband who sold her to Jagat and Madhu who were involved in prostitution. Informer informs Rajasthan police that Sarita is involved in selling girls and thus they finall succeed in finding Zarina and thus she meets her Daughter Tara and Aasma. Will cops track Nadeem and Ratan?

The Inside Story
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दिल्ली यूं तो लड़कियों के लिए कितनी डरावनी है यह बताने की कोई जरूरत नहीं है लेकिन जब कभी राजधानी में लड़कियों पर हो रहे अत्याचार की तस्वीरें सामने आती हैं तो निगाहें शर्म से झुक जाती हैं. चाहे आप जेसिका लाल कांड (यहाँ क्लिक करे) को लें या फिर धौला कुंआ रेप केस हर जगह इंसानियत और इज्जत तार-तार होती दिखेगी. हाल का जो केस है उसमें भी बच्चियों पर हो रहे जुल्म की काली कहानी सामने आती है. बेबी फलक आज देश में छोटी और नवजात बच्चियों पर हो रहे जुल्म का चेहरा बन चुकी है और उसे अस्पताल के बाहर छोड़ने वाली 14 वर्षीय लड़की वेश्यावृत्ति के उस घिनौने रूप को दर्शाती है जो आज देश के हर हिस्से में पाया जाता है.

बेबी फलक को 18 जनवरी को 14 वर्षीय एक लड़की एम्स में भर्ती कराने लाई थी. जब दो वर्षीय फलक को अस्पताल में भर्ती कराया गया था तब इसकी स्थिति बेहद गंभीर थी. बच्ची के शरीर पर किसी इंसान के दांत से काटने के कई निशान तथा अन्य जख्म पाए गए और मस्तिष्क भी बुरी तरह प्रभावित था. अब तक फलक का दो बार मस्तिष्क का ऑपरेशन हो चुका है. लेकिन इसके बाद भी बच्ची की हालत नाजुक बनी हुई है. अब वह बच्ची बचती है या नहीं इसका फैसला भगवान ही कर सकते हैं.

इस पूरे केस में सबसे महत्वपूर्ण रोल निभाने वाली 14 वर्षीय लड़की की स्थिति इस देश की उन लाखों लड़कियों की दास्तां बयां करती है जो घरेलू हिंसा की वजह से घर से तो भाग जाती हैं लेकिन उन्हें जिस्म के दलाल वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेल देते हैं.

14 वर्षीय किशोरी को बच्ची को एम्स में छोड़ने के समय बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया था किंतु उस समय उसने ज्यादा कुछ नहीं बताया था. उसकी काउंसिलिंग कराने के बाद जब दोबारा बयान कराया गया तब उसने सनसनीखेज खुलासा किया. उसने बताया कि पिता की क्रूरता के बाद वह जून महीने में घर से भाग गई थी. इसके बाद वह जिन महिलाओं के संपर्क में आई वे उससे वेश्यावृति कराने लगीं. उसे इसके लिए एटा भी ले जाया गया.

इस पूरे कांड में एक और बात सामने आई कि औरत ही औरत की दुश्मन भी होती है. पूजा नामक जिस औरत ने उस बच्ची को सहारा दिया था उसी ने उसे देह व्यापार में धकेल दिया था. यहां तक कि पूजा के पति संदीप ने भी किशोरी से तीन बार दुष्कर्म किया. इसके अलावा एक हफ्ते के करार पर किशोरी को पूजा ने मुनीरका में एक महिला के घर भेजा था. वहां से किशोरी को अलग-अलग ग्राहकों के पास भेजा जाने लगा. राजकुमार उर्फ दिलशाद का काम किशोरी को ग्राहकों के पास छोड़ना और वहां से लाना होता था. इससे उसकी किशोरी से पहचान हुई. दोनों ने तीन महीने पूर्व मंदिर में शादी कर ली और महिपालपुर गांव में रहने लगे. लेकिन पूजा ने यहां भी उस लड़की का पीछा नहीं छोड़ा और उसे तंग करने लगी.

लेकिन अभी तक यह खुलासा नहीं हुआ है कि आखिर उस लड़की को वह बच्ची मिली कहां थी? और उस बच्ची के असली माता-पिता हैं कौन? लेकिन इस केस में जहां एक औरत ने ही एक औरत को बेच दिया वहीं एक बच्ची ने अपने जैसी बच्ची को मौत से हारने नहीं दिया. इतने जुल्म होने के बाद भी उसमें इंसानियत बची थी और इसीलिए वह बच्ची को लेकर अस्पताल गई. यह दर्शाता है कि चाहे हैवानियत कितनी भी पांव पसार ले लेकिन इंसानियत को ढक पाना उसके बस की बात नहीं.

फलक की मां मिली, बहन का भी पता चला, भाई दिल्ली में
दिल्ली (ब्यूरो)। फलक का मामला फिल्मों की तरह चल रहा है । जिसे मुजरिम समझा जाता है वह हालात का मारा पीड़ित निकल आता है। फलक की मां पर सारा देश गुस्से में था कि वह कैसी मां है। अब पता चला है कि वह खुद जुल्म की शिकार है। फलक की एक बहन और भाई भी हैं। बहन का पता चल गया है । एम्स में भर्ती फलक की बड़ी बहन भी मिल गई है। करीब चार वर्षीय फलक की बहन को दिल्ली पुलिस मंगलवार सुबह तक यहां पहुंचने की संभावना है।

एम्स में भर्ती नन्ही फलक को उसकी मां मिल गई है। मां मुन्नी खातून (25) ने फोटो देखकर बच्ची की पहचान कर ली है। पति की आपराधिक प्रवृति के कारण मुन्नी संगठित गिरोह के कब्जे में आ गई थी। महिलाओं द्वारा संचालित इस गिरोह ने पहले मुन्नी पर वेश्यावृति करने का दबाव बनाया। मुन्नी ने मना कर दिया तो गिरोह के लोगों ने राजस्थान में एक युवक से दो लाख 70 हजार रुपये लेकर मुन्नी की शादी करा दी। आरोपियों ने मुन्नी के बच्चे अपने पास रख लिए थे। उसे झांसा दिया गया था कि शादी में कोई बाधा न हो, इसके लिए यह जरूरी है। बच्चे बाद में सौंप दिए जाएंगे। शादी के बाद इन्होंने मुन्नी पर पति के घर में चोरी करने का भी दबाव बनाया था। वसंत कुंज थाना पुलिस ने लक्ष्मी और कांता चौधरी नामक दो महिलाओं को गिरफ्तार किया है।

महिला सरोज समेत कई लोगों की तलाश है। पुलिस अफसरों का कहना है कि इससे मानव तस्करी के बड़े गिरोह का पर्दाफाश हो सकता है, जोकि राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और बिहार में सक्रिय है। दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी मुन्नी का पति मो. शाह हुसैन आपराधिक प्रवृति का है। मुन्नी के लिए दो बेटियों और एक बेटे को पालना कठिन हो रहा था। मोबाइल के जरिये वह मुजफ्फरपुर में युवक शंकर के संपर्क में आई। शंकर ने प्यार का नाटक कर उसे शादी करने का झांसा दिया। शंकर ने उत्तमनगर में रहने वाली लक्ष्मी को अपनी बहन बताकर मुन्नी से मिलवाया। लक्ष्मी ने भी मुन्नी से शंकर के साथ शादी करने की बात कही। एक दिन लक्ष्मी मुजफ्फरपुर जाकर मुन्नी को ले आई।

लक्ष्मी ने बड़ी बेटी (4) को वहीं छुड़वा दिया। लक्ष्मी ने मुन्नी को दिल्ली में कुछ दिन अपने घर रखा। मुन्नी की लाचारी का फायदा उठा उसने वेश्यावृत्ति करने का दबाव बनाया। मुन्नी ने इनकार कर दिया तो लक्ष्मी ने हरियाणा निवासी सरोज और राजस्थान निवासी कांता चौधरी के जरिये झुंझुनू, राजस्थान निवासी युवक हरपाल से शादी करा दी। मुन्नी को अविवाहित बताया गया था।

मुन्नी ने शादी के बाद सारी बात पति हरपाल को बताई। इस बात पर पंचायत भी हुई थी, पर समाज की इज्जत के नाम पर मामले को दबा दिया गया। शादी के बाद मुन्नी ने बच्चे मांगे तो आरोपियों ने उससे हरपाल के घर में चोरी कर भाग जाने की बात कही। पुलिस ने कांता को कोठपुतली, राजस्थान और लक्ष्मी को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। पुलिस टीमें राजस्थान, हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र और दिल्ली में दबिश दे रही हैं।

एम्स में भर्ती फलक की बड़ी बहन सीमा (बदला हुआ नाम) भी मिल गई है। करीब चार वर्षीय सीमा को लेकर दिल्ली पुलिस के मंगलवार सुबह तक यहां पहुंचने की संभावना है। फोटो के जरिये मुन्नी खातून ने बड़ी बेटी की पहचान कर ली है। बिहार के मुजफ्फरपुर में जिस व्यक्ति के घर सीमा मिली है, वह दबिश से पहले फरार हो गया था। लक्ष्मी जब मुन्नी को बिहार से लाई थी तो सीमा को गुड्डू नामक व्यक्ति के पास छोड़ दिया था। पुलिस मुन्नी के तीनों बच्चों को बेचने के दृष्टिकोण से भी जांच कर रही है। फलक का भाई (5) भी दिल्ली में किसी युवक के पास है।

दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फलक के बड़े भाई करीम (बदला नाम) को मुजफ्फरपुर के गांव (जहां मुन्नी रहती थी) में कुत्ते ने काट लिया था। मुन्नी टीके लगवाने के लिए ट्रेन से करीम को मुजफ्फरपुर ले जाती थी। सफर के दौरान उसे मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पर शंकर मिला था। यहां शंकर ने उसका मोबाइल लिया और अपने मोबाइल पर मिस कॉल कर ली। इसके बाद वह मुन्नी को फोन कर प्यार का नाटक करने लगा। उसने शादी का झांसा देकर मुन्नी को लक्ष्मी के हाथ सौंप दिया। आरोपियों ने मुन्नी की शादी रोहतक में की। सरोज यहीं की रहने वाली है। शादी के दौरान सरोज मुन्नी की मां बनी और कांता चौधरी मौसी। पिता का देहांत होने की बात कही गई थी। शादी में काफी संख्या में लोग जमा हुए थे। दूल्हा हरपाल बारात लेकर आया था। शादी के दौरान बनी अलबम पुलिस ने बरामद कर ली है।