Part 1


Part 2


Part 3

The Inside Story
​​गुजरात के बोटाड जिला के देवालिया गांव में एक गर्भवती महिला की कहानी बेहद दर्दनाक है. करीब आठ महीने तक बलात्कार का शिकार होती रही ये महिला अब गर्भवती है. गर्भ में पल रहे बलात्कारियों के बच्चे को गिराना चाहती है. लेकिन गुजरात हाईकोर्ट ने उसे इस बात की इजाजत देने से इनकार कर दिया है.

​​गुजरात के बोटाड ज़िला के देवालिया गांव में कांसे और स्टील के बर्तनों से सजे कमरे में एक चारपाई पर चुपचाप लेटी हुई ये महिला सिर्फ रोजमर्रा के कामकाज निपटाने या अपनी आठ महीने की दर्दनाक कहानी पुलिस या​​ मीडिया वालों को सुनाने के लिए ही उठती हैं.

सामूहिक बलात्कार की शिकार 23 साल की यह युवती बताती हैं, 'उन्होंने करीब आठ महीने तक रोज मेरा बलात्कार किया. चार लोग तो नियमित थे, बाकी आते-जाते रहते थे. अगर मैं कुछ ऐसा करती जो उन्हें पसंद न आता तो वह उसे पीटते. मुझे रोने में भी डर लगता था.'

कभी एक खुश बेटी, बीवी और मां रही इस युवती के सात माह के गर्भ को गिराने की याचिका को पिछले हफ्ते गुजरात उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया. अब वह अपने मायके में ही रह रही है. उसके मां-पिता की नजरें भी उसी पर टिकी रहती हैं.

वह कहती हैं, 'यह मेरे बलात्कारियों का बच्चा है. मैं इसकी मां हूं लेकिन अगर यह बच्चा मेरे साथ रहेगा तो कोई भी मुझे और मेरे परिवार को स्वीकार नहीं करेगा. अदालत ने गर्भपात की इजाजत नहीं दी. मैं सरकार से प्रार्थना करती हूं कि वह इस बच्चे को अपने सरंक्षण में ले ले और किसी अनाथालय में दे दे.'

परिवार के अंदर बेचैनी साफ नजर आती है. पीड़िता अपने गर्भ में पल रहे बच्चे को त्यागने के विचार से शायद पूरी तरह सहमत नहीं है. बच्चे को अपने पास रखने के सवाल पर वह चुप हो जाती हैं और धीरे से अपनी मां की ओर देखती हैं. उनकी मां जवाब देती हैं, 'यह बच्चे को कैसे रख सकती है? अगर यह ऐसा करेगी तो समाज और गांव हमें बहिष्कृत कर देगा. मेरे दो और बच्चे हैं. मेरा 14 साल का लड़का कुंवारा रह जाएगा. कोई भी हमारी इज्जत नहीं करेगा.'

वो कहती हैं, 'यह मां है लेकिन बच्चा बलात्कारियों का है, हम उसे नहीं रख सकते.' जब मां यह कह रही थी तो पीड़िता एक कुर्सी पर सिर झुकाए और पल्ला ओढ़े बैठी हुई थीं. वह उस दहशत और सदमे के बारे में बात भी मुश्किल से ही कर पाती हैं. उन दिनों का जिक्र उसकी आंखों में आंसू ले आता है.

खरगोश का गोश्त खिलाते थे
अपने 18 महीने के बेटे को खेलता देखते हुए वह कहती हैं, 'रात को वह जंगल में खरगोश और काले हिरणों का शिकार करने जाते. दो लोग मेरे साथ रुक जाते और गलत काम (बलात्कार) करते. फिर उन दो की जगह दूसरे दो आ जाते. महीनों तक हर रात यही होता रहा.' पीड़िता के ससुरालवालों ने उसे घर में घुसने से रोका तो उसके पति भी घर छोड़कर साथ ही आ गए. वह कहती हैं, 'एक रात जब मेरे अपहरणकर्ताओं ने एक खरगोश को काटा तो उसके पेट में से दो नन्हें खरगोश निकले. मैं खुद को रोक नहीं पाई और तुरंत उनमें से एक को उठा लिया जिसने मेरी उंगलियां कुतरनी शुरू कर दीं. इससे मुझे अपने बच्चों की याद आ गई और मैंने रोना शुरू कर दिया.'

पुलिस को दी शिकायत में पीड़िता ने सात लोगों को नामजद किया है और बताया है कि वह उसे लगातार पीटते थे. बात करते हुए उसके हाथ और जबान कांपते हैं. वो कहती है, 'मुझे रोता देखकर एक को ग़ुस्सा आ गया और वो अपनी बंदूक से मुझे पीटने लगा जिसमें बाकी भी शामिल हो गए. उस घटना के बाद उन्होंने कुछ दिन तक मुझे भूखा रखा. मैंने खाना मांगा तो उन्होंने मुझे ख़रगोश का गोश्त दिया, जो मैं खा नहीं पाई.'

'बलात्कार नहीं लिव-इन संबंध'
पीड़िता के पति ने पिछले साल जुलाई में सूरत में अपनी पत्नी के लापता होने की पुलिस रिपोर्ट दर्ज करवाई थी. पीड़िता के अपहरण से पहले शहर में उनकी जिंदगी आराम से गुजर रही थी. पीड़िता के परिवार को उन्हें ढूंढने के लिए पुलिस और नेताओं के चक्कर काटने पड़े लेकिन कोई मदद नहीं मिली. अभियुक्त दाफर समुदाय से हैं जो गुजरात की खानाबदोश जाति है. पीड़िता गुजरात के देवी पूजक समुदाय की हैं.

सात नामजद अभियुक्तों में से पांच को गिरफ्तार कर लिया गया है. इस मामले में गुजरात पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठे. पीड़िता की मां कहती हैं, 'उसके गायब होने के कुछ दिन बाद मुझे उसके अपहरणकर्ताओं के बारे में पता चला. मैंने पुलिस को बताया तो उन्होंने कहा कि वह अपनी मर्जी से उनके साथ रह रही है और उसने यह लिखकर दिया है कि उसके लिव-इन संबंध हैं. लेकिन कौन कैद रहने और बलात्कार किए जाने के लिए अपनी मर्जी से कागज पर दस्तखत करता है. पुलिस ने मेरी बात पर यकीन नहीं किया.'

लेकिन इस मामले के जांच अधिकारी पुलिस उपाध्यक्ष तेजस पटेल इससे अनभिज्ञता जताते हैं, 'पीड़िता या उसके परिवार के साथ इस तरह के व्यवहार के बारे में मुझे नहीं पता. हमने पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है. एक अभियुक्त, गांव के सरपंच ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ अदालत से स्टे ऑर्डर ले लिया है और एक फरार है.'

एफआईआर नहीं लिखी
लेकिन पीड़िता और उनके परिजन पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हैं. पीड़िता के पारिवारिक दोस्त सरदार सिंह मोरी कहते हैं, 'अपहर्ताओं के कब्जे से बच निकलने में कामयाब होने पर पीड़िता और उनकी मां घंटों तक जंगल में छुपे रहे, उसके बाद हिम्मत जुटाकर वह पुलिस के पास गए. लेकिन जैसी आशंका थी स्थानीय पुलिसकर्मियों ने शिकायत लिखने से इनकार कर दिया और फिर हमने महिला पुलिस हेल्पलाइन को फोन किया जिसके बाद न चाहते हुए भी हमारी शिकायत लिखी गई.'

पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए एफआईआर के 48 घंटे बाद ले जाया गया. हालांकि मामले के कोर्ट में जाने और राष्ट्रीय अखबारों की सुर्खियां बनने के बाद गुजरात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का निरीक्षण शुरू किया.

इस मामले में पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर रोष का सामना कर रही गुजरात सरकार ने गुरुवार को पीड़िता को 20,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी. उसके लिए अब बलात्कार और गर्भ में पल रहे बच्चे को पैदा करने की मुश्किल से ज्यादा बड़ी चुनौती है 'पवित्र' होने की कवायद को पार करना.

Thanks To:
http://aajtak.intoday.in/story/a-painful-story-of-a-pregnant-lady-of-gujarat-1-809947.html

A woman who was gang raped for eight months in Gujarat, western India, is now not only pregnant as a result, but has been ordered to face "purification tests" by her community's local courts. The BBC's Ankur Jain reports on what this gruelling ritual will entail and why it is still endured.

The shy, softly spoken 23-year-old - who cannot be named for legal reasons - was living happily with her husband and two children in Surat when she was abducted last July and repeatedly gang raped by more than five men over several months.

She is now heavily pregnant and her petition for abortion was turned down by the Gujarat High Court because she was too advanced in her pregnancy.

Now, staying in a two-room house in Devaliya village, Ranpur Taluka, Gujarat, she spends her time with her two children. Her in-laws refuse to take her back and her husband has left his parents to be with her. But she spends all her time with the children, snuggling them and holding them tight.

And while her own parents are glad to have her back, they are concerned that the baby she is soon to give birth to will affect the rest of the family.

"I have two other children both unmarried. If she delivers the baby and keeps it then no one will marry them," explained her mother. "My 14-year-old son will get cast out. The only way out is that she will have to undergo the 'chokha thavani viddhi' (purification ritual) and whatever the community decides will be final."
The role of barley seeds

Such a ritual is limited to the villages of Gujarat's Devipujak community, to which the victim belongs.

The Devipujak group follows a strong caste and religious system and has its own community courts which decide on various matters including infidelity and rape.

It is not clear whether these hearings are condoned or condemned by the authorities, but they have never been investigated by the police.

An elder from the village, Odhabhai Devipujak, explained that a purification ritual is conducted by a tantric - a priest who practices black magic and believes in supernatural powers - and predates the existence of courts and police.

In the ritual, the tantric asks the girl several questions and then checks if she is telling the truth by taking a pinch of barley seeds from a bag and asking her to say whether the number of seeds in his hand are even-numbered or odd.

If the girl gets the answer wrong then the tantric assumes her answers have been lies.

She then has to repeat the process with a 10-kg stone on her head. She has to keep the stone on her head until the tantric is satisfied that she is telling the truth.

"Sometimes it takes months to purify as people lie initially but Goddess knows it all and finally they have to speak the truth," the elder said.
Cast out

"Once the girl is purified and passes the test no-one can point fingers or banish her and her family. But if the girl fails the test and Goddess says she is impure then she might get ostracised from the community," he said.

Sardarsinh Mori, a friend of the victim's family, said such tests were only carried out on women.

"Whenever a husband has doubt about his wife, or an unmarried girl is accused of an affair, to purify a woman and free her from the wrongdoings, a purification process is conducted. For men, the community courts conduct tests to check if they are telling lies but no purification is used," he explained.

The victim's husband, a cart-puller, said he would stand by her.

"I am going to be with her. I have two children and I can't marry again," he said.

The victim said part of her wanted to keep the unborn child, but her fate and the baby's was in the hands of 100-200 people taking part in the purification ritual.

"If I am wrong, the Goddess will tell them," she said.

Thanks to:
http://www.bbc.com/news/world-asia-india-32444349

Botad gangrape victim gives birth to child, govt to take care of newborn

The rape survivor was earlier denied permission to terminate her pregnancy by the Gujarat High Court following which she gave birth to the child.

THE Botad gang rape survivor gave birth to a healthy child at the Bhavnagar civil hospital on Wednesday. The rape survivor was earlier denied permission to terminate her pregnancy by the Gujarat High Court following which she gave birth to the child.

The 23-year-old victim was taken to Bhavanagar civil hospital on July 1. She was under medical care at the hospital for last one week.

A family member close to the victim said, “It was not easy for her at all and till the last minute of her delivery she wanted to get rid of this child. She broke down after delivery and told me that this is a child she doesn’t want to either hold in her hands nor call her own”.

After the victim is discharged from the hospital, she will be taken to Ranpur in Botad district where she lives with her husband, a cart puller and two children.

The victim who belongs to the Dafer community has to now undergo the process of Shuddhi to “clean herself from the sin”. According to the community’s traditional practices, the victim has to keep a 10 kilograms heavy stone on her head and stand at the village square.

This stone is removed from her head only after the community’s deity (Mataji) will indicate that she is now ‘clean’. If the victim cannot ‘pass’ this test to prove that the rape was committed on her without her consent, she and her family fears of even getting ostracized, her family members said.

The community observes this procedure only with women against whom they reportedly have suspicion of “having relationship with men before marriage” and those whose husbands have suspicion on them. The women are also made to wear a garland of shoes and while “giving this test”.

The Gujarat High Court in April this year had rejected a petition filed by the victim, who had sought permission to terminate her nearly seven-month pregnancy. The court told the victim “to bravely go ahead with the pregnancy and when time comes, deliver the child…” and also directed the state government to look after the mother and the child and not let the baby be abandoned.

Botad Deputy SP Tejas Patel said, “The child will be kept under observation at the hospital for 48 hours after which the child will be handed over to Botad Collector S K Pandya and his office”.

The victim had denied taking care of the child following which it was decided that the district government will take care of the child. The child is expected to be kept in the Shishu Gruh under the disrict government or a NGO who is willing to take care of the child.

As per the FIR lodged at the Ranpur police station in Botad district on March 16, the victim was allegedly abducted in July 2014 from outside her home and gangraped by seven men who kept her at different places for nine to 10 months. When the FIR was lodged she was already 24-week pregnant.

She moved a petition seeking abortion in a lower court which rejected her plea on the ground that provisions of Medical Termination of Pregnancy Act (MTPA) don’t permit abortion in case the pregnancy period exceeded 20 weeks. The victim had then moved the application to the HC.

SP Botad SK Gadhvi said, “We had provided her police protection of guards 24/7 after she filed a case. We had additionally appointed a woman police constable also as a liasoning officer because victim was pregnant and she could require help anytime. When we learnt that she could deliver any moment, we sent her to Bhavnagar civil hospital instead of hospitals in Botad to ensure she gets good medical attention”.

Thanks To:
http://indianexpress.com/article/india/india-others/botad-gangrape-victim-gives-birth-to-child-govt-to-take-care-of-newborn/#sthash.3NBHBhlU.dpufInline